कार्यशाला में कमिश्नर ने वर्ष 2027 तक बाल अपराधों के रोकथाम संबंधी दिलाया संकल्प
UP TIMES NEWS- बाल श्रम तथा अपराधों को मुक्त करने के उद्देश्य से आयुक्त कार्यालय में मंडल स्तरीय कार्यशाला आयोजित हुई। जहां कमिश्नर ने मंडल को पूरी तरह से बाल अपराध मुक्त किए जाने पर जोर दिया।
कमिश्नर चित्रकूट धाम अजीत कुमार के नेतृत्व में यूनिसेफ के सहयोग से श्रम विभाग द्वारा मंडलीय कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में सभी जिलों से आए प्रतिभागियों ने चित्रकूट मंडल को वर्ष 2027 तक बाल श्रम मुक्त करने हेतु कार्ययोजना तैयार की गई। कार्यशाला में जनपद बाँदा, महोबा, चित्रकूट व हमीरपुर के विभिन्न विभागों यथा – शिक्षा,महिला कल्याण, श्रम,स्वास्थ्य,पुलिस, कौशल विकास, अल्पसंख्यक कल्याण, ग्रामीण विकास,बाल कल्याण समिति,जिला बाल संरक्षण इकाइयों (डीसीपीयू) चाइल्ड हेल्पलाइन,मानव तस्करी विरोधी इकाइयों (एएचटीयू) (सीडब्ल्यूसी) के सदस्यों जैसे विभिन्न विभागों और नागरिक समाज संगठनों के 60 से अधिक हितधारकों ने भाग लिया। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) और यूनिसेफ द्वारा विश्व बाल श्रम निषेध दिवस ( 12 June) के अवसर पर जारी 2024 के नवीनतम बाल श्रम वैश्विक अनुमान बताते हैं कि लगभग 138 मिलियन बच्चे (13.8 Cr) – 59 मिलियन लड़कियाँ और 78 मिलियन लड़के – बाल श्रम में हैं। जो विश्व स्तर पर सभी बच्चों का लगभग 8 प्रतिशत है, जिसमें लगभग 54 मिलियन खतरनाक काम में लगे हुए हैं जिससे उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा या विकास को खतरा होने की संभावना है। डेटा ये भी दर्शाता है कि 2020 के बाद से बाल श्रम में 2 करोड़ से अधिक बच्चों की कमी आई है,और 2000 के बाद से बाल श्रम लगभग आधा हो गया है लेकिन फिर भी वैश्विक स्तर पर बाल श्रम को खत्म करने के 2025 के लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सका है। कार्यशाला के दौरान मंडलायुक्त अजीत कुमार ने बाल श्रम के बच्चों की क्षमता पर पड़ने वाले विनाशकारी प्रभावों के बारें में बताया और सभी बच्चों के लिए रचनात्मक और उच्च-गुणवत्ता वाली शिक्षा प्राप्त करना अत्यंत आवश्यक बताया। उन्होंने भारतीय संविधान और राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों का उल्लेख किया, जिनमें बाल श्रम निषेध के प्रावधान हैं। उन्होंने ये भी कहा कि बाल श्रम से मुक्ति एक बच्चे का मौलिक मानवाधिकार है। यह भारतीय संविधान और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संधियों और समझौतों में निहित है।

उन्होंने समाज से बाल श्रम की समस्या को सफलतापूर्वक समाप्त करने के लिए विभिन्न विभागों,गैर-सरकारी संगठनों,परिवारों, समुदायों और जनप्रतिनिधियों के बीच मज़बूत समन्वय और सहयोग के महत्व पर भी ज़ोर दिया। डॉ हेलेन आर सेकर,पूर्व वरिष्ठ फेलो, वीवी गिरी राष्ट्रीय श्रम संस्थान के साथ-साथ परामर्श के लिए नियुक्त विशेषज्ञ ने परामर्श के दौरान बाल श्रम से जुड़े विभिन्न मुद्दों के बारे में बात की थी। उन्होंने बाल श्रम समस्या के साथ-साथ राज्य के विभिन्न क्षेत्रों और उद्योगों जैसे उत्तर प्रदेश के पीतल,ताला,कालीन, कांच कारखानों में बाल श्रम की विस्तृत एकाग्रता का विस्तृत विवरण प्रदान किया। उन्होंने बाल श्रम के आंकड़ों और प्रवृत्तियों के साथ-साथ बाल श्रम के खिलाफ संवैधानिक और कानूनी ढांचे पर भी प्रकाश डाला। श्रम विभाग के राज्य संसाधन प्रकोष्ठ के सैयद रिजवान अली ने बाल और किशोर श्रम अधिनियम 2016 के प्रभावी कार्यान्वयन के साथ-साथ 2027 तक बाल श्रम मुक्त यूपी के लक्ष्यों को प्राप्त करने में विभिन्न संबंधित विभागों की विशिष्ट भूमिकाओं और जिम्मेदारियों के साथ बाल श्रम की राज्य कार्य योजना की मुख्य विशेषताएं प्रस्तुत कीं। उन्होंने बाल और किशोर श्रम अधिनियम 2016 के विभिन्न प्रावधानों और विशेषताओं के बारे में भी प्रस्तुत किया, और राज्य कार्य योजना में बाल श्रम उन्मूलन हेतु विभिन्न विभागों की भूमिका वं बाल श्रम से सम्बंधित सामाजिक सुरक्षा योजनाओ की भी पर विस्तृत जानकारी के साथ विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दी। अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज द्वारा बाल श्रम व किशोर न्याय अधिनियम 2015 से सम्बंधित कानूनी प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की गई। साथ ही साथ उन्होंने बाल अधिकारों से सम्बंधित विषयों – शिक्षा,स्वास्थ्य, पोषण एवं संरक्षण से सम्बंधित मुद्दों पर पर विभिन्न विभागों की भूमिका को इंगित किया गया। कार्यशाला में सहायक पुलिस अधीक्षक बाल सुरक्षा संगठन की नोडल मेविश टॉक,जिला विकास अधिकारी महोबा आदि मौजूद रहे।