वृक्ष लगाने के साथ देखभाल भी है आवश्यक-अजीत

पर्यावरण को संतुलित बनाए रखने के लिए हर किसी को लगाना चाहिए वृक्ष

आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में यातायात नियमों के पालन किए जाने के लिए कमिश्नर ने किया प्रेरित

UP TIMES NEWS-

Hamirpur- वृक्ष पृथ्वी के धरोहर हैं। उन्हें लगाने के साथ उनकी सुरक्षा करना हम सब का दायित्व है। एक तरफ जहां कमिश्नर ने लोगों को वृक्ष लगाने के प्रेरित किया। वहीं दूसरी तरफ दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आयुक्त ने यातायात नियमों के पालन किए जाने सहित वाहन चलाते समय हेलमेट तथा सीट बेल्ट लगाने के लिए संदेश दिया।
अजीत कुमार आयुक्त चित्रकूटधाम मण्डल की अध्यक्षता में जनपद हमीरपुर के चित्रगुप्त इण्टर कालेज राठ में जल संचयन,वृक्षारोपण एवं सड़क सुरक्षा के संबंध में जन जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी में पद्मश्री उमाशंकर पाण्डेय के साथ जनपद के जिलाधिकारी,घनश्याम मीणा, मुख्य विकास अधिकारी, चन्द्रशेखर शुक्ला, जनपद के समस्त जनप्रतिनिधि, ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव, ग्राम रोजगार सेवक, तकनीकी सहायकों द्वारा प्रतिभाग किया गया। अजीत कुमार, आयुक्त, चित्रकूटधाम मण्डल ने सभी प्रतिभागियों को अपना संदेश देते हुए कहा किआप सभी की सक्रिय उपस्थिति और आत्मीय सहभागिता से जल संचयन, वृक्षारोपण एवं सड़क सुरक्षा विषयक जन-जागरूकता गोष्ठी अत्यंत सफल एवं प्रेरणादायक रही। पद्मश्री उमाशंकर पाण्डेय की गरिमामयी उपस्थिति तथा जिलाधिकारी घनश्याम मीणा, मुख्य विकास अधिकारी चन्द्रशेखर शुक्ला सहित जनप्रतिनिधियों, ग्राम प्रधानों,पंचायत सचिवों, रोजगार सेवकों एवं तकनीकी सहायकों की सहभागिता ने यह स्पष्ट कर दिया कि प्रशासन और समाज यदि एकजुट होकर कार्य करें, तो सकारात्मक परिवर्तन अवश्य संभव है।
वर्तमान समय की मांग है कि सड़क सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक उत्तरदायित्व को केवल चर्चा का विषय न बनाकर उसे अपने आचरण में उतारा जाए। उत्तर प्रदेश सरकार सड़क दुर्घटनाओं को लेकर अत्यंत गंभीर है। मुख्यमंत्री ने स्वयं इस पर गहरी चिंता व्यक्त की है। हम सभी का कर्तव्य है कि प्रत्येक नागरिक को ट्रैफिक नियमों, हेलमेट एवं सीट बेल्ट के उपयोग, गति सीमा आदि के विषय में जागरूक करें। विद्यालयों, ग्राम सभाओं और सार्वजनिक स्थलों पर सतत प्रचार-प्रसार के माध्यम से सड़क सुरक्षा को एक जनांदोलन बनाना होगा, जिससे अनावश्यक दुर्घटनाओं को रोका जा सके और अनमोल जीवनों की रक्षा हो।
जल ही जीवन है – इस मंत्र को आत्मसात करते हुए हमें वर्षा जल संचयन को अपनी जीवनशैली में सम्मिलित करना होगा। पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन, प्रत्येक घर, विद्यालय, पंचायत भवन में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की स्थापना तथा जल संरक्षण को सामाजिक आंदोलन का स्वरूप देना अति आवश्यक है।
वृक्षारोपण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि यह हमारी प्रकृति और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक होना चाहिए। मेरा आप सबसे आग्रह है कि “हर नागरिक अपनी माँ के नाम पर एक पौधा अवश्य लगाए” तथा उसकी देखभाल भी सुनिश्चित करे। यह छोटा सा प्रयास आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वायु, हरियाली और संतुलित पर्यावरण की सौगात देगा।
सभी जनप्रतिनिधि एवं ग्राम स्तरीय अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि ग्रामीणजन की समस्याओं का समाधान समयबद्ध, पारदर्शी एवं सरल तरीके से हो। किसी नागरिक को कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़े—यह हमारी कार्यसंस्कृति का मूलभूत उद्देश्य होना चाहिए।
राज्य सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुँचे, इसके लिए आवश्यक है कि आप सभी गांव-गांव और घर-घर जाकर प्रचार-प्रसार करें। साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और सोशल मीडिया का उपयोग कर योजनाओं की जानकारी व्यापक रूप से प्रसारित की जाए, जिससे कोई भी पात्र व्यक्ति योजना लाभ से वंचित न रह जाए। विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चे हमारे समाज का भविष्य हैं। अतः उन्हें शिक्षा के महत्व, स्वच्छता, नैतिक मूल्यों एवं पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूक करें। प्लास्टिक के दुष्परिणामों की जानकारी देकर बच्चों को व्यवहारिक रूप से सतर्क एवं जिम्मेदार बनाएं। अंततः, अब समय है केवल विचार-विमर्श से आगे बढ़कर ठोस कार्य करने का। आइए, हम सभी मिलकर अपने गांव, जनपद, मण्डल और प्रदेश को एक सुरक्षित, स्वच्छ, समृद्ध और संवेदनशील समाज में रूपांतरित करने हेतु एकजुट हों और यह संकल्प लें कि—
“बूँद-बूँद से सागर, पौधा-पौधा से वन और जागरूकता से सुरक्षित जीवन संभव है।”

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